बुरहानपुर ( रमाकांत मोरे) जिले से लगा हुआ पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र राज्य के समाजसेवी गजानन भगत जी जनसंपर्क अधिकारी महाराष्ट्र राज्य मानव अधिकार संरक्षण समिती पुना ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया की महाराष्ट्र सरकार ने निजी प्राइवेट स्कुलो को संचालित संस्थाओं द्वारा शैक्षणिक योग्यता पर विशेष ध्यान देना चाहिए । बचपन से शिक्षा यह जीवन का पहला एवं मुख्य जीवन विकास का मार्ग होता है । जहां बच्चों को उचित शिक्षा , उचित मार्गदर्शन समय-समय पर मिले । हर विद्यार्थी को शालेय शिक्षक एवं शिक्षिकाओं द्वारा बच्चों का शिक्षा में लगन , आत्मिक विश्वास के साथ-साथ पढ़ाई में रुचियां निर्माण होने के लिए शिक्षकों ने प्रेरणा देना चाहिए । संविधान निर्माता डॉक्टर बाबासाहब अंबेडकर जी ने अपने स्वयं के जीवन मे शिक्षा ग्रहण करने के लिए अधिक महत्व दिया था । शिक्षा पाकर जो आज भी एक संविधान निर्माता ही नहीं । प्रख्यात एक महानपुरुष का दर्जा प्राप्त किया है ।

निजी स्कुलों द्वारा जिस भी दुकान का नाम दिया जाता है । ज्यादा पैसा देकर उसी दुकान से बच्चों के शालेय ड्रेस , स्कुल किताबें एवं जुतो सहित अन्य सामग्री को लेने के लिए बच्चों के पालको से स्कुली सामग्री खरीदने के लिए छात्र-छात्राओं के पालको के ऊपर दबाव बनाकर सामग्री लेने के लिए कहा जाता है । जिससे डोनेशन फीस के नाम के साथ परीक्षा फीस , एडमिशन फिस , शालेय स्कुल गाड़ी फिस के नाम पर पालकों से ज्यादा पैसा लेकर बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं । जिससे कई गरीब बच्चों के पालक अपने बच्चों के लिए शिक्षा के लिए मजबुर होकर दिन रात मेहनत कर या बाहर से कर्जा उठाकर बच्चों का भविष्य जीवन सार्थक के लिए कभी कभार माता-पिता अपने शरीर पर दिन प्रतिदिन पहने हुए छोटे , बड़े गहनों को गिरवी रखकर अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर बच्चों के जीवन सार्थक भविष्य के लिए मेहनत कर कमाया हुआ धन को त्याग , समर्पण की भावना रखते हुए अपने बच्चों को शासकीय एक छोटा या बड़ा ऑफिसर की योग्यता प्राप्त कर बच्चों का विकास चाहते है ।




































