बुरहानपुर (मध्यप्रदेश हेड रमाकांत मोरे ) जिले के ग्राम अडगाव में सात दिवसीय संगीतमय शिव महापुराण कथा एवं अखंड हरी नाम संकीर्तन सोहला सप्ताह के चतुर्थ दिवस पर व्यासपीठ पर विराजित कथावाचक हरी भक्त परायण महंत नितिनदास जी महाराज मलकापुर ने अपनी अमृतवाणी से शिव पार्वती के विवाह की कथा का वर्णन करते हुए उपस्थित

श्रद्धालुओं को बताया की शिव-पार्वती विवाह हिंदू धर्म की एक अत्यंत पवित्र और प्रेरणादायक कथा है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पती के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने विवाह के लिए स्वीकृति दी। विवाह हिमालय में बड़े धूमधाम से संपन्न हुआ। देवता, ऋषि-मुनि और गण इस अलौकिक विवाह के साक्षी बने। भगवान शिव वैराग्य और तप के प्रतीक हैं, जबकि माता पार्वती शक्ति, प्रेम और करुणा का स्वरूप हैं। उनका विवाह जीवन में संतुलन, समर्पण और परस्पर सम्मान का संदेश देता है। यह कथा बताती है कि सच्चे प्रेम और धैर्य से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।






























