बुरहानपुर ( रमाकांत मोरे ) अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा, मध्यप्रदेश (जिला–बुरहानपुर) द्वारा “TET से मुक्ति एवं प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना” की प्रमुख मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन जिला कलेक्टर, बुरहानपुर के माध्यम से प्रेषित किया गया।
मोर्चा ने प्रदेश के नॉन-TET शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य किए जाने के हालिया आदेशों का कड़ा विरोध किया। ज्ञापन में कहा गया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की 10 अगस्त 2010 की अधिसूचना एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार कई श्रेणी के शिक्षकों को TET से छूट प्राप्त है। इसके बावजूद हाल में जारी आदेशों के जरिए सभी नॉन-TET शिक्षकों को परीक्षा के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत है।
मोर्चा ने मांग की कि 02 मार्च 2026 और 26 मार्च 2026 के आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए तथा प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि इन आदेशों से शिक्षकों में मानसिक तनाव और सेवा संबंधी असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है।
इसके साथ ही मोर्चा ने यह भी मांग उठाई कि शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए, जिससे पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नगदीकरण, पदोन्नति और अन्य वैधानिक लाभ सुनिश्चित हो सकें।
मोर्चा पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही सकारात्मक निर्णय लेगी।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित:
शालीकराम चौधरी, किशोर जाधव, संतोष निम्भोरे, भानुदास भंगाले, दीपक डोल, प्रमिला सागरे, प्रीति अग्रवाल, तरुण निंबालकर, जयराम निराले, संजय अटकड़े, प्रमोद सातव, यू.आर. मोरे, नन्दकिशोर मोरे, जितेन्द्र शर्मा, अनिल बाविस्कर, विजेश राठौर, असीफ खान।
जारीकर्ता:
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा, मध्यप्रदेश (जिला–बुरहानपुर)
शालीकराम चौधरी (प्रांतीय संयोजक एवं जिला प्रभारी)




































