(अमृत प्रवचन श्रृंखला प्रवाहित)
नीमच – हमें सदैव अच्छे पुण्य कर्म करते रहना चाहिए क्योकि मृत्यु का कोई भरोसा नहीं है मृत्यु कब आ जाए जब हमारी मृत्यु होती है उस समय यदि हमारे भाव पवित्र होते हैं तो हमारा अगला जन्म भी अच्छा होता है इसलिए हमें सदैव पुण्य कर्म करते रहना चाहिए इसलिए पवित्र भाव के बिना आत्मा का कल्याण नहीं हो सकता है। मृत्यु के समय जैसे भाव होंगे पवित्र भाव के परिणाम अच्छे होंगे। पवित्र भाव से ही आयुष का बंधन होता है।यह बात साध्वी महतरा मनोहर शिशु परम पूज्य प्रज्ञा नीधि प्रशांत मन प्रियंकरा श्री जी मसा ने कही वे महावीर जिनालय मंदिर ट्रस्ट विकास नगर के तत्वाधान में आराधना भवन में आयोजित धर्म सभा में बोल रही थी उन्होंने कहा कि मंदिर में दर्शन करते समय भाव पवित्र और द्रव्य पवित्र उत्कृष्ट रहेंगे तो परिणाम भी उत्कृष्ट आते हैं और परिणाम में आनंद अलग हीआता है रात्रि को सोने से पहले आत्म चिंतन करना चाहिए कि हमने आत्मा के हित और अहित के लिए क्या किया है इस पर हमें ध्यान देना होगा हमारी आत्मा पवित्र रहे इसका स्तर गिरे नहीं इसका हमें ध्यान रखना चाहिए संसार के लिए पूरा जीवन भी लगा दे तो हमारे हाथ कुछ नहीं लगने वाला है हमें हमारे अंतःकरण के प्रति जागृति लाना आवश्यक है जिनशासन पूर्ण शक्तिशाली होता है दुर्गति के द्वार पर ताला लगाने की शक्ति जिन शासन में होती है व्याधि पाप कर्मों से आती है मानव के पास सद्गति की शक्ति होती है सद्गति से मोक्ष तक भी पहुंचा जा सकता है

यह व्याधि कैसे आई इस पर चिंतन करें तो पाप कर्म का परिणाम ही सामने आता है इसलिए हमें पाप कर्म से बचना चाहिए तभी व्याधि भी दूर हो सकती है साधु संतों से प्रेरणा लेकर जीव दया का पालन करना चाहिए जीव दया का पालन करें तो हरी घास पर कभी नहीं चलना चाहिए इससे जीव हत्या का पाप लगता है महिलाएं किसी शादी पार्टी फंक्शन में जाती है तो अपनी साड़ी का मैचिंग अच्छा चयन करती है और सबसे अलग दिखना चाहती है लेकिन मंदिर जाते समय वही पुराना बैग रहता है चिंतन करना होगा कि हम कहां क्या कर रहे हैं परमात्मा को भी प्रतिदिन नए-नए द्रव्यों से परिवर्तन कर पूजा करनी चाहिए हमारे जैसे भाव पवित्र होंगे तो पूजा भी पवित्र परिणाम देगी ।
पोलीस वार्ता मध्यप्रदेश हेड रमाकांत मोरे



































