सभी मजदूर झिरनिया ब्लाक के थे ; पाल के ग्रामीणों ने दुर्घटना स्थल पर पहुंच कर मदद की
महाराष्ट्र में हर दिन मध्य प्रदेश से कम से कम पंद्रह से बीस पिकअप बोलेरो में मजदूर भरे जाते हैं। महाराष्ट्र में हर दिन 500 से 600 मजदूर मजदूरी करने जाते हैं। मजदूरों में बाल मजदूरों की संख्या अधिक है। मध्य प्रदेश प्रशासन को इन जगहों पर जबरन कराए जा रहे बाल श्रम के मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है, जबकि सरकार के नियमों के अनुसार यह अपराध है।फिर भी सारे आम बाल मजदूरो कॉ मजदूरी करने को मजबूर किया जा रहा है।
ऐसा ही एक मामला…
दि 4/6/2025 शाम के समय मध्य प्रदेश सीमा सें 10 किलोमीटर दूरि पर महाराष्ट्र के ग्राम खिरोदा सें खेती का काम पूरा कर के बोरघाट से लौट रहे मजदूरों से भरी पिकअप बोलेरे गारबेडी ग्राम के पास पलटने से 20 वर्षीय युवक अनिल बारेला की घटनास्थल पर ही हुई मृत्यु हो गई और सभी 22 अन्य मजुदूर घायल हो गए ।
सभी मजदुर झिरनिया तहसील के पहाड़ी आंचल के मलगाव कोठा और गाडग्याआम गाव सें थे। पाल पुलिस थाने के पुलिस हैंड कांसपेटल. जगदीश पाटिल पुलिस कोस्टेबल तडवी ने घटनास्थल पर पहुंच कर घायल मजदूरों को ग्रामीणों की मदद सें प्राथमिक उपचार के लिए पाल ग्रामीण अस्पताल पहुंचाया। कुछ मरीजों को जलगांव के सिविल अस्पताल में और अन्य को फैजपुर के डॉ. खचने अस्पताल में भर्ती कराया गया। पाल गांव के लोगों ने कुछ पैसे राशीं जमा किए और घायलों के लिए वाहन बुलाकर मदद की ।
गारखेड़ा के सरपंच रतन सिंह बारेला, ग्राम सदस्य प्रदीप जाधव, भाजपा युवा मो. रावेर, उपाध्यक्ष सुरेश पवार, श्याम चव्हाण, वन मजदूर रतन बरेला, रविंद्र लक्षण चव्हाण, सलीम तड़वी ने घायलों के आगे के इलाज के लिए वाहन मुहैया कराया और उन्हें जलगांव और फैजपूर भेजा। घायलों के नाम इस प्रकार हैं: भूरीबाई, सविता बाई, लाड़कीबाई भिलाला, सुमली बाई, लक्ष्मी बाई, सेवजा बाई, आशा, रूपा, दयाराम, हीरालाल, सुभान, जीतू, शेंगा, पार्वती, नूरली बाई, सुरेश भिलाला, विजय भिलाला, रवि जाति बरेला, ममता बरेला और अनिल बरेला की इलाज के दौरान मौत हो गई।
बाल मजदूर को संख्या अधिक थी।
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महाराष्ट्र में हर दिन मध्य प्रदेश से कम से कम पंद्रह से बीस पिकअप बोलेरो में मजदूर भरे जाते हैं। महाराष्ट्र में हर दिन 500 से 600 मजदूर मजदूरी करने जाते हैं। मजदूरों में बाल मजदूरों की संख्या अधिक है। मध्य प्रदेश प्रशासन को इन जगहों पर जबरन कराए जा रहे बाल श्रम के मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है, जबकि सरकार के नियमों के अनुसार यह अपराध है।फिर भी सारे आम बाल मजदूरो कॉ मजदूरी करने को मजबूर किया जा रहा है।
(समीर तडवी) की रिपोर्ट)




































