गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला!
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) को खत्म करके ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण)’ (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 लागू करने की कड़ी निंदा करती है।
इस ‘मजदूर-विरोधी’ कानून में पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मुख्य भूमिका है, जो मोदी सरकार के इस हमले के प्रमुख शिल्पकार हैं। शिवराज जी, जो खुद को ‘मामा’ और गरीबों का हितैषी बताते हैं, शिवराज जी ने संसद में इस विधेयक को पेश करके ग्रामीण गरीबों के ‘काम के अधिकार’ को कुचल दिया है। यह महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने का अपमान है और करोड़ों मजदूरों की लाइफलाइन छीनने की साजिश है।शिवराज सिंह चौहान ने संसद में दावा किया कि मनरेगा में भ्रष्टाचार और कमियां थीं, लेकिन असलियत यह है कि भाजपा सरकार ने पिछले 11 सालों में मनरेगा को जानबूझकर कमजोर किया। अब नए कानून से मध्य प्रदेश के 92 लाख सक्रिय मजदूरों की रोजी-रोटी केंद्र की मर्जी पर निर्भर हो गई है।
शिवराज जी के मंत्री बनते ही मनरेगा की ‘हत्या’ हो गई – यह संयोग नहीं, सोची-समझी साजिश है !
मध्य प्रदेश पर VB-G RAM G के हमले के मुख्य तथ्य (शिवराज की जिम्मेदारी):₹5,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ – शिवराज का वित्तीय धोखा: नए कानून से फंडिंग 60:40 हो गई है, यानी राज्य को 40% खर्च उठाना पड़ेगा। मध्य प्रदेश पर सालाना ₹5,000 करोड़ से ज्यादा का बोझ पड़ेगा, जबकि राज्य पहले से ₹4 लाख करोड़ कर्ज में है। केंद्रीय मंत्री शिवराज ने संसद में इस विधेयक को पेश करके राज्य की कमर तोड़ दी। ‘मामा’ जी, क्या यह फेडरलिज्म है या गरीबों को सजा?
e-KYC और डिजिटल निष्कासन – शिवराज की तकनीकी साजिश: मध्य प्रदेश में 90.5% मजदूरों का e-KYC लंबित है (देश में सबसे ज्यादा)।
आदिवासी इलाकों जैसे झाबुआ, मंडला, डिंडोरी में इंटरनेट नहीं, लेकिन नए कानून से बायोमेट्रिक्स और डिजिटल सर्विलांस बढ़ेगा। शिवराज जी ने मंत्री के रूप में इस सेंट्रलाइज्ड सिस्टम को थोपा, जिससे लाखों मजदूर बाहर हो जाएंगे। क्या यह गरीबों को बाहर करने की योजना थी?
60 दिनों का ब्लैकआउट –शिवराज की सामंती सोच: फसल मौसम में 60 दिनों तक काम बंद करने का प्रावधान मजदूरों को कम मजदूरी पर निजी खेतों में धकेलेगा। शिवराज ने संसद में इसे कृषि मजदूर उपलब्धता का बहाना बताया, लेकिन यह पलायन बढ़ाने की साजिश है। मध्य प्रदेश में पहले से पलायन की समस्या गंभीर है – ‘मामा’ जी ने इसे और बढ़ावा दिया!
गांधी जी का नाम हटाना – शिवराज की गांधी-विरोधी मानसिकता: मनरेगा से गांधी जी का नाम हटाकर ‘VB-G RAM G’ रखना भाजपा की सोच है। केंद्रीय मंत्री शिवराज ने विधेयक पेश करते हुए इसका बचाव किया। क्या ‘राम’ के नाम पर गरीबों का हक छीनना आपकी राजनीति है?
मांग-आधारित अधिकार से कोटा सिस्टम – शिवराज का अधिकार छीनना: मनरेगा मांग पर आधारित कानूनी अधिकार था, अब केंद्र कोटा तय करेगा। शिवराज जी ने दावा किया कि 125 दिन काम मिलेगा, लेकिन फंड सीमित होने पर मजदूर रोजगार से वंचित रहेंगे यह अधिकारों का हनन है।
यह कदम महात्मा गांधी के आदर्शों का सीधा अपमान है और ग्रामीण रोज़गार पर खुली जंग का ऐलान है। रिकॉर्ड बेरोज़गारी से भारत के युवाओं को तबाह करने के बाद, मोदी सरकार अब गरीब ग्रामीण परिवारों की बची हुई आखिरी आर्थिक सुरक्षा को निशाना बना रही है। हम सड़क से लेकर संसद तक, हर मंच पर इस जन-विरोधी, मज़दूर-विरोधी और फ़ेडरल-विरोधी हमले का विरोध करेंगे।
हम इस जन-विरोधी, श्रमिक-विरोधी और संघीय-विरोधी हमले का हर मंच पर, सड़क से लेकर संसद तक विरोध करेंगे।
सादर प्रकाशनार्थ
रविंद्र महाजन,
अध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी,
बुरहानपुर (ग्रामीण)




































